गंगा जी हमारी आस्था और संस्कृति की पहचान हैं, लेकिन लोगो के स्वार्थी स्वाभाव ने गंगा के अस्तित्व को ही खतरे में डाल दिया है. अभी हाल ही में IIT कानपुर के सेवानिवृत प्रोफ्फेसर श्री GD अग्रवाल जी ने गंगा जी के नैसर्गिक स्वरुप को बचाने के लिए ३८ दिनों का आमरण अनशन किया और सरकार ने दो लिखित पत्रों में यह माना की डॉ. अग्रवाल की मांग सही है. परन्तु लिखित समझौते के ५ दिन बाद ही हाइ कोर्ट नैनीताल का आदेश आता है की परियोजनाओ में काम नही रुकना चाहिए क्योंकि परियोजनाओ से लोगो की रोजी रोटी चलती है. क्या रोजी रोटी के लिए आस्था की लकीर गंगा को मारना जरूरी है. इसी तरह गंगा जी को प्रदूषद मुक्त करने के लिए Matri सदन हरद्वार के स्वामी दयानंद जी उपवास पर बैठे हैं, आखिर कब तक अपनी आस्था को बचाने के लिए संघर्ष करते रहना होगा???????
Monday, March 2, 2009
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